Friday, April 13, 2007

To sudha, with love: Ijazat

I wrote this peice imagining that rekha is the one who had an affair instead of naseer and even after marriage she is recieving letters from that fellow in naseers presence.
This is written by naseers charecter.

मेरी खातिर उसका ज़िक्र कभी खुल कर नहीं किया तुमने
जब भी उसका ख़त आया, चुप चाप पढा
और शायद मेरे पढने के लिए,
मेरी किताबों के पास रख दिया
फाड़ा नहीं, पर दोबारा पढा भी नहीं
मैंने बहुत कोशिश की
कि नज़र बचाके पढूं उसके ख़त
या तुमसे पूंछुं कि क्या लिखा था उसने
और कई बार तुम्हारे चहरे से
अंदाज़ा भी लगाना चाहा ख़त कि सूरत का
पर चहरे ने कभी कुछ कहा नहीं
ख़त पढने कि हिम्मत हुई नहीं
पर आज के ख़त में लगता है
आख़िरी ख़त होने कि बात लिखी है
क्यों कि चाय आज तुमने फींकी बनायीं
और दाल में कंकड़ भी काफी निकले

2 comments:

Anonymous said...

heheeheheh .......i like this one. Its gud.

Kafir said...

beautiful !!!!!!!!